श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 15: भीष्मजीकी आज्ञासे भगवान‍् श्रीकृष्णका युधिष्ठिरसे महादेवजीके माहात्म्यकी कथामें उपमन्युद्वारा महादेवजीकी स्तुति-प्रार्थना, उनके दर्शन और वरदान पानेका तथा अपनेको दर्शन प्राप्त होनेका कथन  »  श्लोक 205
 
 
श्लोक  13.15.205 
दैत्यदानवमुख्यानामाधिपत्यारिमर्दनात्।
कोऽन्य: शक्नोति देवेशाद् दिते: सम्पादितुं सुतान्॥ २०५॥
 
 
अनुवाद
दैत्यों और दानवों के प्रधान हिरण्यकशिपु के विषय में सुना गया है कि वह तीनों लोकों पर प्रभुत्व स्थापित करने तथा अपने शत्रुओं का संहार करने में समर्थ था। अतः मैं पूछ रहा हूँ कि महादेव के अतिरिक्त ऐसा कौन है जो दिति के पुत्रों को ऐसी अतुलनीय समृद्धि प्रदान कर सके?
 
Having looked at the powers which Hiranyakashipu, the chief of the demons and devils, has been heard to possess in establishing dominion over the three worlds and crushing his enemies, I am asking that who other than Lord Mahadeva is there who can bestow such matchless prosperity on the sons of Diti?
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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