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mahabharat 13.15.203: बुद्धिमान पुरुष ब्रह्मा जी को ही समस्त ब्रह्माण्ड का रचयिता मानते हैं, किन्तु उन्हें परम कल्याण भगवान महादेव की आराधना से ही प्राप्त होता है।   |   mahabharat अध्याय 13.15: भीष्मजीकी आज्ञासे भगवान‍् श्रीकृष्णका युधिष्ठिरसे महादेवजीके माहात्म्यकी कथामें उपमन्युद्वारा महादेवजीकी स्तुति-प्रार्थना, उनके दर्शन और वरदान पानेका तथा अपनेको दर्शन प्राप्त होनेका कथन   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 15: भीष्मजीकी आज्ञासे भगवान‍् श्रीकृष्णका युधिष्ठिरसे महादेवजीके माहात्म्यकी कथामें उपमन्युद्वारा महादेवजीकी स्तुति-प्रार्थना, उनके दर्शन और वरदान पानेका तथा अपनेको दर्शन प्राप्त होनेका कथन  »  श्लोक 203
 
 
श्लोक  13.15.203 
स्रष्टारं भुवनस्येह वदन्तीह पितामहम्।
आराध्य स तु देवेशमश्नुते महतीं श्रियम्॥ २०३॥
 
 
अनुवाद
बुद्धिमान पुरुष ब्रह्मा जी को ही समस्त ब्रह्माण्ड का रचयिता मानते हैं, किन्तु उन्हें परम कल्याण भगवान महादेव की आराधना से ही प्राप्त होता है।
 
Wise men consider Lord Brahma as the creator of the whole universe. But they achieve great prosperity only by worshipping Lord Mahadev.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)