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श्लोक 13.15.203  |
स्रष्टारं भुवनस्येह वदन्तीह पितामहम्।
आराध्य स तु देवेशमश्नुते महतीं श्रियम्॥ २०३॥ |
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| अनुवाद |
| बुद्धिमान पुरुष ब्रह्मा जी को ही समस्त ब्रह्माण्ड का रचयिता मानते हैं, किन्तु उन्हें परम कल्याण भगवान महादेव की आराधना से ही प्राप्त होता है। |
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| Wise men consider Lord Brahma as the creator of the whole universe. But they achieve great prosperity only by worshipping Lord Mahadev. |
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