श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 15: भीष्मजीकी आज्ञासे भगवान‍् श्रीकृष्णका युधिष्ठिरसे महादेवजीके माहात्म्यकी कथामें उपमन्युद्वारा महादेवजीकी स्तुति-प्रार्थना, उनके दर्शन और वरदान पानेका तथा अपनेको दर्शन प्राप्त होनेका कथन  »  श्लोक 199
 
 
श्लोक  13.15.199 
मघवन् मघवात्मानं यं वदन्ति सुरेश्वरम्।
सर्वभूतगुरुं देवं वरं तस्माद् वृणीमहे॥ १९९॥
 
 
अनुवाद
माघवान! हम उन मुनियों से वर प्राप्त करना चाहते हैं, जिन्हें भगवान् इन्द्र का स्वरूप और सम्पूर्ण भूतों का गुरु कहते हैं ॥199॥
 
Maghavan! We want to get a groom from the wise men, whom God calls the form of Lord Indra and the Guru of all the ghosts. 199॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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