Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.15.197: पुरन्दर! मैं उन महादेवजी की पूजा करता हूँ जो सम्पूर्ण प्राणियों के रचयिता हैं और उनके विचारों को जानते हैं, जो सम्पूर्ण प्राणियों के संहार (विलय) के एकमात्र स्थान हैं, जो सर्वत्र व्याप्त हैं और सब कुछ देने में समर्थ हैं॥197॥ | mahabharat अध्याय 13.15: भीष्मजीकी आज्ञासे भगवान् श्रीकृष्णका युधिष्ठिरसे महादेवजीके माहात्म्यकी कथामें उपमन्युद्वारा महादेवजीकी स्तुति-प्रार्थना, उनके दर्शन और वरदान पानेका तथा अपनेको दर्शन प्राप्त होनेका कथन । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
पुरन्दर! मैं उन महादेवजी की पूजा करता हूँ जो सम्पूर्ण प्राणियों के रचयिता हैं और उनके विचारों को जानते हैं, जो सम्पूर्ण प्राणियों के संहार (विलय) के एकमात्र स्थान हैं, जो सर्वत्र व्याप्त हैं और सब कुछ देने में समर्थ हैं॥197॥
Purandar! I worship that Mahadevji who is the creator of all beings and knows their thoughts, who is the only place of destruction (merger) of all beings, who is omnipresent and capable of giving everything.॥ 197॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥