Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.15.193: उपमन्यु ने कहा - देवराज ! हम उन्हीं महादेव जी से वर माँगेंगे जिन्हें ब्रह्मवादी महात्माओं ने भिन्न-भिन्न मतानुसार सत्-अत्, व्यक्त-अव्यक्त, सनातन, एक और अनेक कहा है ॥193॥ | mahabharat अध्याय 13.15: भीष्मजीकी आज्ञासे भगवान् श्रीकृष्णका युधिष्ठिरसे महादेवजीके माहात्म्यकी कथामें उपमन्युद्वारा महादेवजीकी स्तुति-प्रार्थना, उनके दर्शन और वरदान पानेका तथा अपनेको दर्शन प्राप्त होनेका कथन । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
उपमन्युरुवाच
सदसद् व्यक्तमव्यक्तं यमाहुर्ब्रह्मवादिन:।
नित्यमेकमनेकं च वरं तस्माद् वृणीमहे॥ १९३॥
अनुवाद
उपमन्यु ने कहा - देवराज ! हम उन्हीं महादेव जी से वर माँगेंगे जिन्हें ब्रह्मवादी महात्माओं ने भिन्न-भिन्न मतानुसार सत्-अत्, व्यक्त-अव्यक्त, सनातन, एक और अनेक कहा है ॥193॥
Upamanyu said – Devraj! We will ask for a boon from the same Mahadev Ji who is called true-unreal, expressed-unexpressed, eternal, one and many according to different beliefs by the Brahmavadi Mahatma. 193॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥