श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 15: भीष्मजीकी आज्ञासे भगवान‍् श्रीकृष्णका युधिष्ठिरसे महादेवजीके माहात्म्यकी कथामें उपमन्युद्वारा महादेवजीकी स्तुति-प्रार्थना, उनके दर्शन और वरदान पानेका तथा अपनेको दर्शन प्राप्त होनेका कथन  »  श्लोक 191
 
 
श्लोक  13.15.191 
यदि नाम जन्म भूयो
भवति मदीयै: पुनर्दोषै:।
तस्मिंस्तस्मिञ्जन्मनि
भवे भवेन्मेऽक्षया भक्ति:॥ १९१॥
 
 
अनुवाद
यदि मेरे दोषों के कारण मुझे इस संसार में बार-बार जन्म लेना पड़े, तो मेरी यही इच्छा है कि प्रत्येक जन्म में मेरी भगवान शिव के प्रति अनन्य भक्ति बनी रहे ॥191॥
 
"If due to my faults I have to take birth again and again in this world, then my only wish is that in each of those births I should have unending devotion towards Lord Shiva." ॥191॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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