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mahabharat 13.15.19-20: पूर्वकाल में ब्रह्मपुत्र तण्डिमुनि ने ब्रह्मलोक में ब्रह्माजी के समक्ष जो शिव-सहस्रनाम सुनाया था, उसे तुम अपने मुख से सुनाओ और उत्तम व्रत का पालन करने वाले ये व्यास आदि तपोधन तथा जितेन्द्रिय महर्षि उसे तुम्हारे मुख से सुनें।   |   mahabharat अध्याय 13.15: भीष्मजीकी आज्ञासे भगवान‍् श्रीकृष्णका युधिष्ठिरसे महादेवजीके माहात्म्यकी कथामें उपमन्युद्वारा महादेवजीकी स्तुति-प्रार्थना, उनके दर्शन और वरदान पानेका तथा अपनेको दर्शन प्राप्त होनेका कथन   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 15: भीष्मजीकी आज्ञासे भगवान‍् श्रीकृष्णका युधिष्ठिरसे महादेवजीके माहात्म्यकी कथामें उपमन्युद्वारा महादेवजीकी स्तुति-प्रार्थना, उनके दर्शन और वरदान पानेका तथा अपनेको दर्शन प्राप्त होनेका कथन  »  श्लोक 19-20
 
 
श्लोक  13.15.19-20 
नाम्नां सहस्रं देवस्य तण्डिना ब्रह्मयोनिना।
निवेदितं ब्रह्मलोके ब्रह्मणो यत् पुराभवत्॥ १९॥
द्वैपायनप्रभृतयस्तथा चेमे तपोधना:।
ऋषय: सुव्रता दान्ता: शृण्वन्तु गदतस्तव॥ २०॥
 
 
अनुवाद
पूर्वकाल में ब्रह्मपुत्र तण्डिमुनि ने ब्रह्मलोक में ब्रह्माजी के समक्ष जो शिव-सहस्रनाम सुनाया था, उसे तुम अपने मुख से सुनाओ और उत्तम व्रत का पालन करने वाले ये व्यास आदि तपोधन तथा जितेन्द्रिय महर्षि उसे तुम्हारे मुख से सुनें।
 
In earlier times, you should narrate the Shiva-Sahasranama which was recited by Brahmaputra Tandimuni in front of Brahmaji in Brahmalok and these Vyas etc Tapodhan and Jitendriya Maharshi who follow the best fast should listen to it from your mouth.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)