Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.15.189: जब तक मेरे स्वामी पशुपति प्रसन्न नहीं होंगे, जिनके मस्तक पर अर्धचन्द्र का उज्ज्वल और स्पष्ट मुकुट सुशोभित है, तब तक मैं वृद्धावस्था, मृत्यु और जन्म-मृत्यु के सैकड़ों आघातों से उत्पन्न शारीरिक कष्टों का भार सहन करता रहूँगा॥189॥ | mahabharat अध्याय 13.15: भीष्मजीकी आज्ञासे भगवान् श्रीकृष्णका युधिष्ठिरसे महादेवजीके माहात्म्यकी कथामें उपमन्युद्वारा महादेवजीकी स्तुति-प्रार्थना, उनके दर्शन और वरदान पानेका तथा अपनेको दर्शन प्राप्त होनेका कथन । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
जब तक मेरे स्वामी पशुपति प्रसन्न नहीं होंगे, जिनके मस्तक पर अर्धचन्द्र का उज्ज्वल और स्पष्ट मुकुट सुशोभित है, तब तक मैं वृद्धावस्था, मृत्यु और जन्म-मृत्यु के सैकड़ों आघातों से उत्पन्न शारीरिक कष्टों का भार सहन करता रहूँगा॥189॥
Until my lord Pashupati, whose head is adorned with a bright and clear crown of the half-moon, is pleased, I shall continue to bear the burden of bodily sufferings resulting from old age, death and the hundreds of blows of birth and death.॥ 189॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥