श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 15: भीष्मजीकी आज्ञासे भगवान‍् श्रीकृष्णका युधिष्ठिरसे महादेवजीके माहात्म्यकी कथामें उपमन्युद्वारा महादेवजीकी स्तुति-प्रार्थना, उनके दर्शन और वरदान पानेका तथा अपनेको दर्शन प्राप्त होनेका कथन  »  श्लोक 185
 
 
श्लोक  13.15.185 
दिवसं दिवसार्धं वा मुहूर्तं वा क्षणं लवम्।
न ह्यलब्धप्रसादस्य भक्तिर्भवति शङ्करे॥ १८५॥
 
 
अनुवाद
जिस मनुष्य पर भगवान शिव की कृपा नहीं है, वह एक दिन, आधा दिन, एक क्षण, एक सेकण्ड या एक क्षण के लिए भी भगवान शिव के प्रति भक्ति नहीं कर सकता ॥185॥
 
The person who does not have the grace of Lord Shiva, cannot have devotion towards Lord Shiva even for a day, half a day, a moment, a second or a moment.॥ 185॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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