Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.15.184: कुटिल कलिकाल को पाकर सब मनुष्यों को भगवान शंकर के चरणों के चिंतन में मन लगाना चाहिए। शिवभक्ति रूपी रसायन का पान करने के बाद सांसारिक रोगों का भय नहीं रहता ॥184॥ | mahabharat अध्याय 13.15: भीष्मजीकी आज्ञासे भगवान् श्रीकृष्णका युधिष्ठिरसे महादेवजीके माहात्म्यकी कथामें उपमन्युद्वारा महादेवजीकी स्तुति-प्रार्थना, उनके दर्शन और वरदान पानेका तथा अपनेको दर्शन प्राप्त होनेका कथन । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
हरचरणनिरतमतिना
भवितव्यमनार्जवं युगं प्राप्य।
संसारभयं न भवति
हरभक्तिरसायनं पीत्वा॥ १८४॥
अनुवाद
कुटिल कलिकाल को पाकर सब मनुष्यों को भगवान शंकर के चरणों के चिंतन में मन लगाना चाहिए। शिवभक्ति रूपी रसायन का पान करने के बाद सांसारिक रोगों का भय नहीं रहता ॥184॥
After finding the crooked Kalikalka, all men should concentrate their mind on the contemplation of the feet of Lord Shankar. After drinking the chemical of devotion to Shiva, there is no longer any fear of worldly diseases. 184॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥