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वाय्वम्बुभुजोऽपि सतो
नरस्य दु:खक्षय: कुतस्तस्य।
भवति हि सुरासुरगुरौ
यस्य न विश्वेश्वरे भक्ति:॥ १८२॥
अनुवाद
चाहे कोई जल या वायु पर जीवित रहे, परन्तु देवताओं और दानवों के गुरु भगवान् विश्वनाथ में भक्ति न रखने पर उसके दुःखों का नाश कैसे हो सकता है ?॥182॥
Even if someone survives on water or air, how can his sorrows be destroyed if he does not have devotion towards Lord Vishwanath, the guru of gods and demons?॥ 182॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥