Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.15.181: यदि मुझे भगवान शंकर के चरणों की पूजा में तत्पर रहने का अवसर मिले, तो चाण्डालों में भी जन्म लेने पर मैं उसे सहर्ष स्वीकार कर लूँगा। किन्तु भगवान शिव की अनन्य भक्ति से रहित होने के कारण मैं इन्द्र के घर में भी स्थान नहीं पाना चाहता। 181॥ | mahabharat अध्याय 13.15: भीष्मजीकी आज्ञासे भगवान् श्रीकृष्णका युधिष्ठिरसे महादेवजीके माहात्म्यकी कथामें उपमन्युद्वारा महादेवजीकी स्तुति-प्रार्थना, उनके दर्शन और वरदान पानेका तथा अपनेको दर्शन प्राप्त होनेका कथन । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
जन्म श्वपाकमध्येऽपि
मेऽस्तु हरचरणवन्दनरतस्य।
मा वानीश्वरभक्तो
भवानि भवनेऽपि शक्रस्य॥ १८१॥
अनुवाद
यदि मुझे भगवान शंकर के चरणों की पूजा में तत्पर रहने का अवसर मिले, तो चाण्डालों में भी जन्म लेने पर मैं उसे सहर्ष स्वीकार कर लूँगा। किन्तु भगवान शिव की अनन्य भक्ति से रहित होने के कारण मैं इन्द्र के घर में भी स्थान नहीं पाना चाहता। 181॥
If I get an opportunity to remain active in worshiping the feet of Lord Shankar, then I will gladly accept it if I am born among the Chandalas also. But being devoid of exclusive devotion to Lord Shiva, I do not want to find a place even in Indra's house. 181॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥