श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 15: भीष्मजीकी आज्ञासे भगवान‍् श्रीकृष्णका युधिष्ठिरसे महादेवजीके माहात्म्यकी कथामें उपमन्युद्वारा महादेवजीकी स्तुति-प्रार्थना, उनके दर्शन और वरदान पानेका तथा अपनेको दर्शन प्राप्त होनेका कथन  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  13.15.18 
भीष्म उवाच
सुरासुरगुरो देव विष्णो त्वं वक्तुमर्हसि।
शिवाय विश्वरूपाय यन्मां पृच्छद् युधिष्ठिर:॥ १८॥
 
 
अनुवाद
भीष्म बोले - 'देवो और दानव गुरुओ! हे भगवान विष्णु! राजा युधिष्ठिर ने मुझसे शिव के जिस विराट रूप का माहात्म्य पूछा है, उसे बताने में आप ही समर्थ हैं। ॥18॥
 
Bhishma said, 'O Devas and Demons Gurus! Lord Vishnu! You are the only one capable of telling me the greatness of the cosmic form of Shiva that King Yudhishthira has asked me. ॥ 18॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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