Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 13.15.173-174: भगवान इन्द्र अपने तेज से प्रकाशित होते हुए, ऐरावत नामक विशाल हाथी की पीठ पर बैठे हुए, लाल नेत्रों और अमृत के समान कान वाले, टेढ़ी सूंड वाले, चार दांतों वाले, भयानक और मद से उन्मत्त दिखाई देते हुए वहाँ पहुँचे। उनके सिर पर मुकुट, गले में हार और भुजाओं में बाजूबंद उनकी शोभा बढ़ा रहे थे।   |   mahabharat अध्याय 13.15: भीष्मजीकी आज्ञासे भगवान‍् श्रीकृष्णका युधिष्ठिरसे महादेवजीके माहात्म्यकी कथामें उपमन्युद्वारा महादेवजीकी स्तुति-प्रार्थना, उनके दर्शन और वरदान पानेका तथा अपनेको दर्शन प्राप्त होनेका कथन   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 15: भीष्मजीकी आज्ञासे भगवान‍् श्रीकृष्णका युधिष्ठिरसे महादेवजीके माहात्म्यकी कथामें उपमन्युद्वारा महादेवजीकी स्तुति-प्रार्थना, उनके दर्शन और वरदान पानेका तथा अपनेको दर्शन प्राप्त होनेका कथन  »  श्लोक 173-174
 
 
श्लोक  13.15.173-174 
सुधावदातं रक्ताक्षं स्तब्धकर्णं मदोत्कटम्।
आवेष्टितकरं घोरं चतुर्दंष्ट्रं महागजम्॥ १७३॥
समास्थित: स भगवान‍् दीप्यमान: स्वतेजसा।
आजगाम किरीटी तु हारकेयूरभूषित:॥ १७४॥
 
 
अनुवाद
भगवान इन्द्र अपने तेज से प्रकाशित होते हुए, ऐरावत नामक विशाल हाथी की पीठ पर बैठे हुए, लाल नेत्रों और अमृत के समान कान वाले, टेढ़ी सूंड वाले, चार दांतों वाले, भयानक और मद से उन्मत्त दिखाई देते हुए वहाँ पहुँचे। उनके सिर पर मुकुट, गले में हार और भुजाओं में बाजूबंद उनकी शोभा बढ़ा रहे थे।
 
Lord Indra arrived there, shining with his brilliance, sitting on the back of the great elephant Airavat, with red eyes and erect ears, shining like nectar, adorned with a curved trunk, having four teeth and looking terrifying and mad with intoxication. A crown on his head, a necklace around his neck and armlets on his arms were adorning him.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)