श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 15: भीष्मजीकी आज्ञासे भगवान‍् श्रीकृष्णका युधिष्ठिरसे महादेवजीके माहात्म्यकी कथामें उपमन्युद्वारा महादेवजीकी स्तुति-प्रार्थना, उनके दर्शन और वरदान पानेका तथा अपनेको दर्शन प्राप्त होनेका कथन  »  श्लोक 171
 
 
श्लोक  13.15.171 
ततस्तुष्टो महादेव: सर्वलोकेश्वर: प्रभु:।
एकभक्त इति ज्ञात्वा जिज्ञासां कुरुते तदा॥ १७१॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् सम्पूर्ण लोकों के स्वामी भगवान महादेवजी मुझे अपना अनन्य भक्त जानकर संतुष्ट हो गए और मेरी परीक्षा लेने लगे॥171॥
 
Thereafter, Lord Mahadev, the Lord of all the worlds, became satisfied knowing that I was His exclusive devotee and began to test me.॥ 171॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas