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श्लोक 13.15.170  |
शतानि सप्त चैवाहं वायुभक्षस्तदाभवम्।
एकं वर्षसहस्रं तु दिव्यमाराधितो मया॥ १७०॥ |
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| अनुवाद |
| फिर शेष सात सौ वर्षों तक मैं केवल वायु पीकर जीवित रहा। इस प्रकार एक हजार दिव्य वर्षों तक मैंने उनकी आराधना की॥170॥ |
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| Then for the remaining seven hundred years I survived by drinking only air. In this way I worshipped Him for a thousand divine years.॥ 170॥ |
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