श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 15: भीष्मजीकी आज्ञासे भगवान‍् श्रीकृष्णका युधिष्ठिरसे महादेवजीके माहात्म्यकी कथामें उपमन्युद्वारा महादेवजीकी स्तुति-प्रार्थना, उनके दर्शन और वरदान पानेका तथा अपनेको दर्शन प्राप्त होनेका कथन  »  श्लोक 169
 
 
श्लोक  13.15.169 
एकं वर्षशतं चैव फलाहारस्ततोऽभवम्।
द्वितीयं शीर्णपर्णाशी तृतीयं चाम्बुभोजन:॥ १६९॥
 
 
अनुवाद
पहले सौ वर्ष तक मैंने फल खाए, दूसरी शताब्दी में गिरे हुए पत्ते चबाकर जीवित रहा और तीसरी शताब्दी में केवल जल पीकर जीवन निर्वाह किया॥169॥
 
First, I ate fruits for one hundred years. In the second century, I survived by chewing fallen leaves and in the third century, I sustained my life by drinking only water.॥ 169॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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