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mahabharat 13.15.166: बेटा! उनके भक्त बनो और उनमें अनुरक्त रहो। सदैव उन पर आश्रित रहो, उनकी शरण में रहो और महादेवजी का निरंतर भजन करते रहो। ऐसा करने से तुम्हें मनोवांछित वस्तु प्राप्त होगी॥ 166॥   |   mahabharat अध्याय 13.15: भीष्मजीकी आज्ञासे भगवान‍् श्रीकृष्णका युधिष्ठिरसे महादेवजीके माहात्म्यकी कथामें उपमन्युद्वारा महादेवजीकी स्तुति-प्रार्थना, उनके दर्शन और वरदान पानेका तथा अपनेको दर्शन प्राप्त होनेका कथन   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 15: भीष्मजीकी आज्ञासे भगवान‍् श्रीकृष्णका युधिष्ठिरसे महादेवजीके माहात्म्यकी कथामें उपमन्युद्वारा महादेवजीकी स्तुति-प्रार्थना, उनके दर्शन और वरदान पानेका तथा अपनेको दर्शन प्राप्त होनेका कथन  »  श्लोक 166
 
 
श्लोक  13.15.166 
तद्भक्तस्तद्‍गतो नित्यं तन्निष्ठस्तत्परायण:।
भज पुत्र महादेवं तत: प्राप्स्यसि चेप्सितम्॥ १६६॥
 
 
अनुवाद
बेटा! उनके भक्त बनो और उनमें अनुरक्त रहो। सदैव उन पर आश्रित रहो, उनकी शरण में रहो और महादेवजी का निरंतर भजन करते रहो। ऐसा करने से तुम्हें मनोवांछित वस्तु प्राप्त होगी॥ 166॥
 
Son! Become His devotee and remain attached to Him. Always depend on Him and surrender to Him and keep worshipping Mahadevji continuously. By doing this you will get the desired object.॥ 166॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)