श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 15: भीष्मजीकी आज्ञासे भगवान‍् श्रीकृष्णका युधिष्ठिरसे महादेवजीके माहात्म्यकी कथामें उपमन्युद्वारा महादेवजीकी स्तुति-प्रार्थना, उनके दर्शन और वरदान पानेका तथा अपनेको दर्शन प्राप्त होनेका कथन  »  श्लोक 165
 
 
श्लोक  13.15.165 
वादको गायनश्चैव सहस्रशतलोचन:।
एकवक्त्रो द्विवक्त्रश्च त्रिवक्त्रोऽनेकवक्त्रक:॥ १६५॥
 
 
अनुवाद
वह वाद्य बजानेवाला और गायक है। उसके लाखों नेत्र हैं। उसके एक मुख, दो मुख, तीन मुख और अनेक मुख हैं॥165॥
 
He is a musical instrument player and a singer. He has lakhs of eyes. He has one face, two faces, three faces and many faces.॥ 165॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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