श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 15: भीष्मजीकी आज्ञासे भगवान‍् श्रीकृष्णका युधिष्ठिरसे महादेवजीके माहात्म्यकी कथामें उपमन्युद्वारा महादेवजीकी स्तुति-प्रार्थना, उनके दर्शन और वरदान पानेका तथा अपनेको दर्शन प्राप्त होनेका कथन  »  श्लोक 160
 
 
श्लोक  13.15.160 
वेदीमध्ये तथा यूपे गोष्ठमध्ये हुताशने।
दृश्यते दृश्यते चापि बालो वृद्धो युवा तथा॥ १६०॥
 
 
अनुवाद
वे ही यज्ञवेदी पर, यज्ञशाला में, गौशाला में तथा जलती हुई अग्नि में भी दिखाई देते हैं। वे ही बालक, वृद्ध तथा युवा रूप में भी दिखाई देते हैं। 160।
 
He is the one who is seen on the sacrificial altar, in the yup, in the cowshed and in the burning fire. He is also seen in the form of a child, an old man and a young man. 160.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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