श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 15: भीष्मजीकी आज्ञासे भगवान‍् श्रीकृष्णका युधिष्ठिरसे महादेवजीके माहात्म्यकी कथामें उपमन्युद्वारा महादेवजीकी स्तुति-प्रार्थना, उनके दर्शन और वरदान पानेका तथा अपनेको दर्शन प्राप्त होनेका कथन  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  13.15.16 
एष शक्तो महाबाहुर्वक्तुं भगवतो गुणान्।
विभूतिं चैव कात्‍स्‍न्‍‍‍र्येन सत्यां माहेश्वरीं नृप॥ १६॥
 
 
अनुवाद
हे नरेश्वर! भगवान महेश्वर के गुणों और उनके वास्तविक ऐश्वर्य का पूर्णतः वर्णन करने में केवल ये महाबाहु श्रीकृष्ण ही समर्थ हैं॥16॥
 
Nareshwar! Only this mighty-armed Shri Krishna is capable of completely describing the qualities of Lord Maheshwar and His true opulence. 16॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)