Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.15.159: वे जप करते हैं और जपवाते हैं; वे तप करते हैं और तपस्वी होते हैं (तपस्या अपने ही उद्देश्य के लिए की जाती है)। वे दान देते हैं और दान लेते हैं; वे योग करते हैं और ध्यान करते हैं ॥159॥ | mahabharat अध्याय 13.15: भीष्मजीकी आज्ञासे भगवान् श्रीकृष्णका युधिष्ठिरसे महादेवजीके माहात्म्यकी कथामें उपमन्युद्वारा महादेवजीकी स्तुति-प्रार्थना, उनके दर्शन और वरदान पानेका तथा अपनेको दर्शन प्राप्त होनेका कथन । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
वे जप करते हैं और जपवाते हैं; वे तप करते हैं और तपस्वी होते हैं (तपस्या अपने ही उद्देश्य के लिए की जाती है)। वे दान देते हैं और दान लेते हैं; वे योग करते हैं और ध्यान करते हैं ॥159॥
They chant and are chanted; they perform tapasya and are tapasya (penance is performed for their own purpose). They give alms and receive alms; they practice yoga and meditate. ॥159॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥