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mahabharat 13.15.156: अपने अनुयायियों के साथ वह हंसता है, गाता है, सुंदर नृत्य करता है और विचित्र संगीत वाद्ययंत्र भी बजाता है। 156.   |   mahabharat अध्याय 13.15: भीष्मजीकी आज्ञासे भगवान‍् श्रीकृष्णका युधिष्ठिरसे महादेवजीके माहात्म्यकी कथामें उपमन्युद्वारा महादेवजीकी स्तुति-प्रार्थना, उनके दर्शन और वरदान पानेका तथा अपनेको दर्शन प्राप्त होनेका कथन   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  13.15.156 
हसते गायते चैव नृत्यते च मनोहरम्।
वादयत्यपि वाद्यानि विचित्राणि गणैर्युत:॥ १५६॥
 
 
अनुवाद
अपने अनुयायियों के साथ वह हंसता है, गाता है, सुंदर नृत्य करता है और विचित्र संगीत वाद्ययंत्र भी बजाता है। 156.
 
In the company of his followers, he laughs, sings, performs beautiful dances and also plays strange musical instruments. 156.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)