Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.15.154: कभी वह हर्षित होकर आनन्द देता है, कभी कुपित होकर क्रोध दिखाता है और कभी गर्जना करता है; वह अपने हाथों में चक्र, भाला, गदा, मूसल, तलवार और कमरबंद धारण करता है॥154॥ | mahabharat अध्याय 13.15: भीष्मजीकी आज्ञासे भगवान् श्रीकृष्णका युधिष्ठिरसे महादेवजीके माहात्म्यकी कथामें उपमन्युद्वारा महादेवजीकी स्तुति-प्रार्थना, उनके दर्शन और वरदान पानेका तथा अपनेको दर्शन प्राप्त होनेका कथन । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
नन्दते कुप्यते चापि तथा हुंकारयत्यपि।
चक्री शूली गदापाणिर्मुसली खड्गपट्टिशी॥ १५४॥
अनुवाद
कभी वह हर्षित होकर आनन्द देता है, कभी कुपित होकर क्रोध दिखाता है और कभी गर्जना करता है; वह अपने हाथों में चक्र, भाला, गदा, मूसल, तलवार और कमरबंद धारण करता है॥154॥
Sometimes he gives joy by being joyful, sometimes he becomes angry and shows his wrath and sometimes he roars; he holds in his hands the discus, spear, mace, pestle, sword and sash.॥ 154॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥