श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 15: भीष्मजीकी आज्ञासे भगवान‍् श्रीकृष्णका युधिष्ठिरसे महादेवजीके माहात्म्यकी कथामें उपमन्युद्वारा महादेवजीकी स्तुति-प्रार्थना, उनके दर्शन और वरदान पानेका तथा अपनेको दर्शन प्राप्त होनेका कथन  »  श्लोक 149
 
 
श्लोक  13.15.149 
अनेककटिपादश्च अनेकोदरवक्त्रधृक्।
अनेकपाणिपार्श्वश्च अनेकगणसंवृत:॥ १४९॥
 
 
अनुवाद
उसके अनेक पैर और कटिभाग हैं। उसके अनेक उदर और मुख हैं। उसकी भुजाएँ और पार्श्व भी असंख्य हैं। उसे चारों ओर से अनेक पार्षद घेरे हुए हैं॥149॥
 
He has many legs and waist parts. He has many stomachs and faces. His hands and sides are also innumerable. Many councillors surround him from all sides.॥ 149॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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