श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 15: भीष्मजीकी आज्ञासे भगवान‍् श्रीकृष्णका युधिष्ठिरसे महादेवजीके माहात्म्यकी कथामें उपमन्युद्वारा महादेवजीकी स्तुति-प्रार्थना, उनके दर्शन और वरदान पानेका तथा अपनेको दर्शन प्राप्त होनेका कथन  »  श्लोक 148
 
 
श्लोक  13.15.148 
दण्डी छत्री च कुण्डी च द्विजानां धारणस्तथा।
षण्मुखो वै बहुमुखस्त्रिनेत्रो बहुशीर्षक:॥ १४८॥
 
 
अनुवाद
वे ब्राह्मणों के चिह्न अर्थात् दण्ड, छत्र और कमण्डलु धारण करते हैं। कभी उनके छह मुख होते हैं और कभी अनेक मुख होते हैं। कभी उनकी तीन आँखें होती हैं। कभी वे अनेक सिर बनाते हैं॥148॥
 
They wear the symbols of the Brahmins, i.e., a staff, an umbrella and a waterpot (kamandalu). Sometimes they have six faces and sometimes many faces. Sometimes they have three eyes. Sometimes they make many heads.॥ 148॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas