श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 15: भीष्मजीकी आज्ञासे भगवान‍् श्रीकृष्णका युधिष्ठिरसे महादेवजीके माहात्म्यकी कथामें उपमन्युद्वारा महादेवजीकी स्तुति-प्रार्थना, उनके दर्शन और वरदान पानेका तथा अपनेको दर्शन प्राप्त होनेका कथन  »  श्लोक 147
 
 
श्लोक  13.15.147 
छागशार्दूलरूपश्च अनेकमृगरूपधृक्।
अण्डजानां च दिव्यानां वपुर्धारयते भव:॥ १४७॥
 
 
अनुवाद
वे बकरे और शार्दूल के रूप में भी उपलब्ध हैं। वे नाना प्रकार के मृगों और वन्य पशुओं का भी रूप धारण करते हैं तथा भगवान शिव दिव्य पक्षियों का भी रूप धारण करते हैं ॥147॥
 
He is also available in the form of a goat and a shardul. He also takes the form of various types of deer and wild animals and Lord Shiva also takes the form of divine birds. ॥147॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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