Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.15.145-146: महादेवजी हंस, कौआ, मोर, गिरगिट, सारस, बगुला, गीध और चक्रांग (विशेष हंस) का भी रूप धारण करते हैं। वे पर्वत, गाय, हाथी, घोड़ा, ऊँट और गधे के रूप में भी प्रकट होते हैं॥145-146॥ | mahabharat अध्याय 13.15: भीष्मजीकी आज्ञासे भगवान् श्रीकृष्णका युधिष्ठिरसे महादेवजीके माहात्म्यकी कथामें उपमन्युद्वारा महादेवजीकी स्तुति-प्रार्थना, उनके दर्शन और वरदान पानेका तथा अपनेको दर्शन प्राप्त होनेका कथन । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
हंसकाकमयूराणां कृकलासकसारसाम्।
रूपाणि च बलाकानां गृध्रचक्राङ्गयोरपि॥ १४५॥
करोति वा स रूपाणि धारयत्यपि पर्वतम्।
गोरूपं च महादेवो हस्त्यश्वोष्ट्रखराकृति:॥ १४६॥
अनुवाद
महादेवजी हंस, कौआ, मोर, गिरगिट, सारस, बगुला, गीध और चक्रांग (विशेष हंस) का भी रूप धारण करते हैं। वे पर्वत, गाय, हाथी, घोड़ा, ऊँट और गधे के रूप में भी प्रकट होते हैं॥145-146॥
Mahadevji also assumes the form of swan, crow, peacock, chameleon, crane, heron, vulture and chakrang (special swan). He also appears in the shape of mountain, cow, elephant, horse, camel and donkey.॥145-146॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥