श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 15: भीष्मजीकी आज्ञासे भगवान‍् श्रीकृष्णका युधिष्ठिरसे महादेवजीके माहात्म्यकी कथामें उपमन्युद्वारा महादेवजीकी स्तुति-प्रार्थना, उनके दर्शन और वरदान पानेका तथा अपनेको दर्शन प्राप्त होनेका कथन  »  श्लोक 144
 
 
श्लोक  13.15.144 
व्याघ्रसिंहमृगाणां च तरक्ष्वृक्षपतत्रिणाम्।
उलूकश्वशृगालानां रूपाणि कुरुतेऽपि च॥ १४४॥
 
 
अनुवाद
वह बाघ, सिंह, हिरण, सियार, भालू, पक्षी, उल्लू, कुत्ता और सियार के रूप भी धारण करता है।144.
 
He also takes the forms of tiger, lion, deer, jackal, bear, bird, owl, dog and jackal. 144.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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