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mahabharat 13.15.141-142h: भगवान् मनुष्य, अप्सराएँ, भूत, पिशाच, किरात, शबर, अनेक जलचर तथा जंगली भीलों का भी रूप धारण करते हैं। ॥141 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 13.15: भीष्मजीकी आज्ञासे भगवान‍् श्रीकृष्णका युधिष्ठिरसे महादेवजीके माहात्म्यकी कथामें उपमन्युद्वारा महादेवजीकी स्तुति-प्रार्थना, उनके दर्शन और वरदान पानेका तथा अपनेको दर्शन प्राप्त होनेका कथन   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 15: भीष्मजीकी आज्ञासे भगवान‍् श्रीकृष्णका युधिष्ठिरसे महादेवजीके माहात्म्यकी कथामें उपमन्युद्वारा महादेवजीकी स्तुति-प्रार्थना, उनके दर्शन और वरदान पानेका तथा अपनेको दर्शन प्राप्त होनेका कथन  »  श्लोक 141-142h
 
 
श्लोक  13.15.141-142h 
नराणां देवनारीणां तथा प्रेतपिशाचयो:।
किरातशबराणां च जलजानामनेकश:॥ १४१॥
करोति भगवान‍् रूपमाटव्यशबराण्यपि।
 
 
अनुवाद
भगवान् मनुष्य, अप्सराएँ, भूत, पिशाच, किरात, शबर, अनेक जलचर तथा जंगली भीलों का भी रूप धारण करते हैं। ॥141 1/2॥
 
The Lord also takes the forms of men, celestial nymphs, ghosts, vampires, Kiratas, Shabars, numerous aquatic animals and wild Bhils. ॥141 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)