श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 15: भीष्मजीकी आज्ञासे भगवान‍् श्रीकृष्णका युधिष्ठिरसे महादेवजीके माहात्म्यकी कथामें उपमन्युद्वारा महादेवजीकी स्तुति-प्रार्थना, उनके दर्शन और वरदान पानेका तथा अपनेको दर्शन प्राप्त होनेका कथन  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  13.15.14 
ऐश्वर्यं यादृशं तस्य जगद्योनेर्महात्मन:।
तदयं दृष्टवान् साक्षात् पुत्रार्थे हरिरच्युत:॥ १४॥
 
 
अनुवाद
जगत के कारणरूप भगवान शिव का ऐश्वर्य इन अच्युत श्रीहरि ने अपने पुत्र के लिए तपस्या करते हुए प्रत्यक्ष देखा है॥14॥
 
The opulence of Lord Shiva, who is the cause of the world, has been seen directly by this infallible Shri Hari while doing penance for his son. 14॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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