श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 15: भीष्मजीकी आज्ञासे भगवान‍् श्रीकृष्णका युधिष्ठिरसे महादेवजीके माहात्म्यकी कथामें उपमन्युद्वारा महादेवजीकी स्तुति-प्रार्थना, उनके दर्शन और वरदान पानेका तथा अपनेको दर्शन प्राप्त होनेका कथन  »  श्लोक 130
 
 
श्लोक  13.15.130 
कोऽयमम्ब महादेव: स कथं च प्रसीदति।
कुत्र वा वसते देवो द्रष्टव्यो वा कथञ्चन॥ १३०॥
 
 
अनुवाद
अम्ब ! ये महादेवजी कौन हैं ? और वे कैसे प्रसन्न होते हैं ? शिवजी कहाँ रहते हैं और उनका दर्शन कैसे होता है ?॥130॥
 
‘Amb! Who is this Mahadevji? And how does he become pleased? Where does the Shiva deity live and how can one see him?॥130॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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