vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Apps
About
Contact
श्री महाभारत
»
पर्व 13: अनुशासन पर्व
»
अध्याय 15: भीष्मजीकी आज्ञासे भगवान् श्रीकृष्णका युधिष्ठिरसे महादेवजीके माहात्म्यकी कथामें उपमन्युद्वारा महादेवजीकी स्तुति-प्रार्थना, उनके दर्शन और वरदान पानेका तथा अपनेको दर्शन प्राप्त होनेका कथन
»
श्लोक 130
श्लोक
13.15.130
कोऽयमम्ब महादेव: स कथं च प्रसीदति।
कुत्र वा वसते देवो द्रष्टव्यो वा कथञ्चन॥ १३०॥
अनुवाद
अम्ब ! ये महादेवजी कौन हैं ? और वे कैसे प्रसन्न होते हैं ? शिवजी कहाँ रहते हैं और उनका दर्शन कैसे होता है ?॥130॥
‘Amb! Who is this Mahadevji? And how does he become pleased? Where does the Shiva deity live and how can one see him?॥130॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
About Us
|
Contact Us
|
Privacy Policy
|
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×