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श्लोक 13.15.130  |
कोऽयमम्ब महादेव: स कथं च प्रसीदति।
कुत्र वा वसते देवो द्रष्टव्यो वा कथञ्चन॥ १३०॥ |
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| अनुवाद |
| अम्ब ! ये महादेवजी कौन हैं ? और वे कैसे प्रसन्न होते हैं ? शिवजी कहाँ रहते हैं और उनका दर्शन कैसे होता है ?॥130॥ |
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| ‘Amb! Who is this Mahadevji? And how does he become pleased? Where does the Shiva deity live and how can one see him?॥130॥ |
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