Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.15.124-125h: जो लोग पवित्र हैं, जो वन में मिलने वाली वस्तुओं का ही भोजन करते हैं, जो वन के आश्रमों में निवास करते हैं, जो ग्राम्य भोजन से विरत रहते हैं तथा केवल वन के फल और मूल खाते हैं, वे दूध कैसे प्राप्त कर सकते हैं?॥124 1/2॥ | mahabharat अध्याय 13.15: भीष्मजीकी आज्ञासे भगवान् श्रीकृष्णका युधिष्ठिरसे महादेवजीके माहात्म्यकी कथामें उपमन्युद्वारा महादेवजीकी स्तुति-प्रार्थना, उनके दर्शन और वरदान पानेका तथा अपनेको दर्शन प्राप्त होनेका कथन । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
जो लोग पवित्र हैं, जो वन में मिलने वाली वस्तुओं का ही भोजन करते हैं, जो वन के आश्रमों में निवास करते हैं, जो ग्राम्य भोजन से विरत रहते हैं तथा केवल वन के फल और मूल खाते हैं, वे दूध कैसे प्राप्त कर सकते हैं?॥124 1/2॥
‘Those who are pure, who eat only the things found in the forest, who reside in forest hermitages, who abstain from rural food and eat only the fruits and roots of the forest, how can they get milk?॥ 124 1/2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥