श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 15: भीष्मजीकी आज्ञासे भगवान‍् श्रीकृष्णका युधिष्ठिरसे महादेवजीके माहात्म्यकी कथामें उपमन्युद्वारा महादेवजीकी स्तुति-प्रार्थना, उनके दर्शन और वरदान पानेका तथा अपनेको दर्शन प्राप्त होनेका कथन  »  श्लोक 123-124h
 
 
श्लोक  13.15.123-124h 
आस्थितानां नदीं दिव्यां वालखिल्यैर्निषेविताम्॥ १२३॥
कुत: क्षीरं वनस्थानां मुनीनां गिरिवासिनाम्।
 
 
अनुवाद
जो पर्वतों और वनों में रहने वाले ऋषिगण बाल-खिल्यों द्वारा सेवित दिव्य नदी गंगा के सहारे बैठे हैं, उन्हें दूध कहाँ से मिलेगा?॥123 1/2॥
 
Where will those sages living in mountains and forests, who are sitting with the help of the divine river Ganga served by the child-khilyas, get milk?॥ 123 1/2॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas