श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 15: भीष्मजीकी आज्ञासे भगवान‍् श्रीकृष्णका युधिष्ठिरसे महादेवजीके माहात्म्यकी कथामें उपमन्युद्वारा महादेवजीकी स्तुति-प्रार्थना, उनके दर्शन और वरदान पानेका तथा अपनेको दर्शन प्राप्त होनेका कथन  »  श्लोक 120
 
 
श्लोक  13.15.120 
स च पिष्टरसस्तात न मे प्रीतिमुपावहत्।
ततोऽहमब्रुवं बाल्याज्जननीमात्मनस्तदा॥ १२०॥
 
 
अनुवाद
पिताजी! इसीलिए मुझे आटे का रस पसंद नहीं आया; इसलिए बचपन के स्वभाव के कारण मैंने माँ से कहा -
 
Father! That is why I did not like the flour juice; therefore, due to my childish nature I said to my mother -
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)