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mahabharat 13.15.119: उस अमृत के समान स्वादिष्ट दूध को पीकर मैंने जान लिया कि दूध का स्वाद कैसा होता है और वह कैसे प्राप्त होता है ॥119॥   |   mahabharat अध्याय 13.15: भीष्मजीकी आज्ञासे भगवान‍् श्रीकृष्णका युधिष्ठिरसे महादेवजीके माहात्म्यकी कथामें उपमन्युद्वारा महादेवजीकी स्तुति-प्रार्थना, उनके दर्शन और वरदान पानेका तथा अपनेको दर्शन प्राप्त होनेका कथन   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 15: भीष्मजीकी आज्ञासे भगवान‍् श्रीकृष्णका युधिष्ठिरसे महादेवजीके माहात्म्यकी कथामें उपमन्युद्वारा महादेवजीकी स्तुति-प्रार्थना, उनके दर्शन और वरदान पानेका तथा अपनेको दर्शन प्राप्त होनेका कथन  »  श्लोक 119
 
 
श्लोक  13.15.119 
तस्याहं तत् पय: पीत्वा रसेन ह्यमृतोपमम्।
ज्ञात्वा क्षीरगुणांश्चैव उपलभ्य हि सम्भवम्॥ ११९॥
 
 
अनुवाद
उस अमृत के समान स्वादिष्ट दूध को पीकर मैंने जान लिया कि दूध का स्वाद कैसा होता है और वह कैसे प्राप्त होता है ॥119॥
 
By drinking that milk which was as delicious as nectar, I came to know what milk tastes like and how it can be obtained.॥ 119॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)