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mahabharat 13.15.115: तब मैंने बचपना करते हुए अपनी माँ से कहा, ‘माँ! मुझे खाने के लिए चावल और दूध दो।’ 115.   |   mahabharat अध्याय 13.15: भीष्मजीकी आज्ञासे भगवान‍् श्रीकृष्णका युधिष्ठिरसे महादेवजीके माहात्म्यकी कथामें उपमन्युद्वारा महादेवजीकी स्तुति-प्रार्थना, उनके दर्शन और वरदान पानेका तथा अपनेको दर्शन प्राप्त होनेका कथन   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 15: भीष्मजीकी आज्ञासे भगवान‍् श्रीकृष्णका युधिष्ठिरसे महादेवजीके माहात्म्यकी कथामें उपमन्युद्वारा महादेवजीकी स्तुति-प्रार्थना, उनके दर्शन और वरदान पानेका तथा अपनेको दर्शन प्राप्त होनेका कथन  »  श्लोक 115
 
 
श्लोक  13.15.115 
ततोऽहमब्रुवं बाल्याज्जननीमात्मनस्तथा।
क्षीरोदनसमायुक्तं भोजनं हि प्रयच्छ मे॥ ११५॥
 
 
अनुवाद
तब मैंने बचपना करते हुए अपनी माँ से कहा, ‘माँ! मुझे खाने के लिए चावल और दूध दो।’ 115.
 
Then, being childish, I said to my mother, 'Mother! Give me rice and milk to eat.' 115.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)