Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.15.111-112h: तात! प्रथम सत्ययुग में व्याघ्रपाद नाम से प्रसिद्ध एक अत्यन्त यशस्वी ऋषि हुए थे। वे वेद और वेदांगों के पारंगत विद्वान थे। 111 1/2॥ | mahabharat अध्याय 13.15: भीष्मजीकी आज्ञासे भगवान् श्रीकृष्णका युधिष्ठिरसे महादेवजीके माहात्म्यकी कथामें उपमन्युद्वारा महादेवजीकी स्तुति-प्रार्थना, उनके दर्शन और वरदान पानेका तथा अपनेको दर्शन प्राप्त होनेका कथन । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
पुरा कृतयुगे तात ऋषिरासीन्महायशा:॥ १११॥
व्याघ्रपाद इति ख्यातो वेदवेदाङ्गपारग:।
अनुवाद
तात! प्रथम सत्ययुग में व्याघ्रपाद नाम से प्रसिद्ध एक अत्यन्त यशस्वी ऋषि हुए थे। वे वेद और वेदांगों के पारंगत विद्वान थे। 111 1/2॥
Tat! In the first Satyayuga, there was a very famous sage, who was famous by the name Vyaghrapada. He was an expert scholar of Vedas and Vedangas. 111 1/2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥