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श्लोक 13.15.111-112h  |
पुरा कृतयुगे तात ऋषिरासीन्महायशा:॥ १११॥
व्याघ्रपाद इति ख्यातो वेदवेदाङ्गपारग:। |
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| अनुवाद |
| तात! प्रथम सत्ययुग में व्याघ्रपाद नाम से प्रसिद्ध एक अत्यन्त यशस्वी ऋषि हुए थे। वे वेद और वेदांगों के पारंगत विद्वान थे। 111 1/2॥ |
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| Tat! In the first Satyayuga, there was a very famous sage, who was famous by the name Vyaghrapada. He was an expert scholar of Vedas and Vedangas. 111 1/2॥ |
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