श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 15: भीष्मजीकी आज्ञासे भगवान‍् श्रीकृष्णका युधिष्ठिरसे महादेवजीके माहात्म्यकी कथामें उपमन्युद्वारा महादेवजीकी स्तुति-प्रार्थना, उनके दर्शन और वरदान पानेका तथा अपनेको दर्शन प्राप्त होनेका कथन  »  श्लोक 110-111h
 
 
श्लोक  13.15.110-111h 
यदवाप्तं च मे पूर्वं देवदेवान्महेश्वरात्॥ ११०॥
तत् सर्वं निखिलेनाद्य कथयिष्यामि तेऽनघ।
 
 
अनुवाद
हे अनघ! पूर्वकाल में मुझे जो कुछ भगवान महेश्वर से प्राप्त हुआ था, उसे आज मैं तुम्हें विस्तारपूर्वक बताऊंगा।
 
O Anagha! Today I shall tell you in full detail whatever I had received from the Supreme God, Maheshwar, in the past. 110 1/2
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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