श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 15: भीष्मजीकी आज्ञासे भगवान‍् श्रीकृष्णका युधिष्ठिरसे महादेवजीके माहात्म्यकी कथामें उपमन्युद्वारा महादेवजीकी स्तुति-प्रार्थना, उनके दर्शन और वरदान पानेका तथा अपनेको दर्शन प्राप्त होनेका कथन  »  श्लोक 104
 
 
श्लोक  13.15.104 
तमाह भगवान‍् रुद्र: साक्षात् तुष्टोऽस्मि तेऽनघ।
ग्रन्थकृल्लोकविख्यातो भवितास्यजरामर:॥ १०४॥
 
 
अनुवाद
तब भगवान रुद्र ने उसके समक्ष प्रकट होकर कहा - 'अनघ! मैं तुमसे बहुत संतुष्ट हूँ। तुम विश्वविख्यात लेखक और अमर होगे ॥104॥
 
Then Lord Rudra appeared before him and said - 'Anagh! I am very satisfied with you. You will be a world famous writer and immortal. 104॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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