श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 15: भीष्मजीकी आज्ञासे भगवान‍् श्रीकृष्णका युधिष्ठिरसे महादेवजीके माहात्म्यकी कथामें उपमन्युद्वारा महादेवजीकी स्तुति-प्रार्थना, उनके दर्शन और वरदान पानेका तथा अपनेको दर्शन प्राप्त होनेका कथन  »  श्लोक 102
 
 
श्लोक  13.15.102 
अक्षयं च कुलं तेऽस्तु महर्षिभिरलंकृतम्।
भविष्यति द्विजश्रेष्ठ: सूत्रकर्ता सुतस्तव॥ १०२॥
 
 
अनुवाद
‘तुम्हारा कुल अमर होगा और महान ऋषियों से सुशोभित होगा। तुम्हारा पुत्र महान ब्राह्मण और सूत्रकार होगा।’॥102॥
 
‘Your clan will be immortal and adorned with great sages. Your son will be a great Brahmin and a Sutra writer.’॥102॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas