श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 149: बन्धन-मुक्ति, स्वर्ग, नरक एवं दीर्घायु और अल्पायु प्रदान करनेवाले शरीर, वाणी और मनद्वारा किये जानेवाले शुभाशुभ कर्मोंका वर्णन  »  श्लोक 60
 
 
श्लोक  13.149.60 
एष दीर्घायुषां मार्ग: सुवृत्तानां सुकर्मिणाम्।
प्राणिहिंसाविमोक्षेण ब्रह्मणा समुदीरित:॥ ६०॥
 
 
अनुवाद
यह पुण्यात्मा और दीर्घायु पुरुषों का लक्षण है जो अच्छे कर्म करते हैं। स्वयं भगवान ब्रह्मा ने इस मार्ग का उपदेश दिया है। यह सब जीवों के प्रति हिंसा का त्याग करने से ही प्राप्त होता है। 60॥
 
This is a symptom of virtuous and long-lived people who perform good deeds. Lord Brahma himself has preached this path. This is achieved only by renouncing violence towards all living beings. 60॥
 
इतिश्री महाभारते अनुशासनपर्वणि दानधर्मपर्वणि उमामहेश्वरसंवादे चतुश्चत्वारिंशदधिकशततमोऽध्याय:॥ १४४॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत अनुशासनपर्वके अन्तर्गत दानधर्मपर्वमें उमामहेश्वरसंवादविषयक एक सौ चौवालीसवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ १४४॥

 
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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