श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 149: बन्धन-मुक्ति, स्वर्ग, नरक एवं दीर्घायु और अल्पायु प्रदान करनेवाले शरीर, वाणी और मनद्वारा किये जानेवाले शुभाशुभ कर्मोंका वर्णन  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  13.149.5 
सत्यधर्मरता: सन्त: सर्वलिङ्गविवर्जिता:।
धर्मलब्धार्थभोक्तारस्ते नरा: स्वर्गगामिन:॥ ५॥
 
 
अनुवाद
जो मनुष्य धर्म से अर्जित धन का उपभोग करते हैं, जो आश्रम के समस्त चिह्नों से विरक्त रहते हुए भी सत्य और धर्म में तत्पर रहते हैं, वे स्वर्ग को जाते हैं ॥5॥
 
Those men who enjoy the wealth earned through Dharma, who remain detached from all the symbols of ashrama and yet remain devoted to truth and Dharma, they go to heaven. ॥ 5॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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