Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.149.49-51h: देवि! जो मनुष्य दूसरों को मारने के लिए हाथ में दण्ड लेकर सदैव भयंकर रूप धारण करता है, जो प्रतिदिन अपने शस्त्रों से संसार के प्राणियों का संहार करता है, जो किसी पर दया नहीं करता, जो समस्त प्राणियों को सदैव व्याकुल रखता है तथा जो अत्यंत क्रूर होकर चींटियों और कीड़ों को भी आश्रय नहीं देता, ऐसा मनुष्य घोर नरक में जाता है। ॥49-50 1/2॥ | mahabharat अध्याय 13.149: बन्धन-मुक्ति, स्वर्ग, नरक एवं दीर्घायु और अल्पायु प्रदान करनेवाले शरीर, वाणी और मनद्वारा किये जानेवाले शुभाशुभ कर्मोंका वर्णन । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
देवि! जो मनुष्य दूसरों को मारने के लिए हाथ में दण्ड लेकर सदैव भयंकर रूप धारण करता है, जो प्रतिदिन अपने शस्त्रों से संसार के प्राणियों का संहार करता है, जो किसी पर दया नहीं करता, जो समस्त प्राणियों को सदैव व्याकुल रखता है तथा जो अत्यंत क्रूर होकर चींटियों और कीड़ों को भी आश्रय नहीं देता, ऐसा मनुष्य घोर नरक में जाता है। ॥49-50 1/2॥
Devi! A person who always assumes a fearsome form with a stick in his hand to kill others, who daily kills the creatures of the world with his weapons in his hand, who has no mercy for anyone, who always keeps all creatures in agitation and who, being extremely cruel, does not even give shelter to ants and insects, such a person goes to a terrible hell. ॥ 49-50 1/2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥