श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 149: बन्धन-मुक्ति, स्वर्ग, नरक एवं दीर्घायु और अल्पायु प्रदान करनेवाले शरीर, वाणी और मनद्वारा किये जानेवाले शुभाशुभ कर्मोंका वर्णन  »  श्लोक 46
 
 
श्लोक  13.149.46 
दुष्प्रज्ञा: केचिदाभान्ति केचिदाभान्ति पण्डिता:।
महाप्राज्ञास्तथैवान्ये ज्ञानविज्ञानभाविन:॥ ४६॥
 
 
अनुवाद
कुछ लोग मूर्खता से युक्त प्रतीत होते हैं, कुछ विद्वान् प्रतीत होते हैं और बहुत से लोग ज्ञान और बुद्धि से युक्त, अत्यन्त बुद्धिमान प्रतीत होते हैं ॥ 46॥
 
Some people appear to be of foolishness, while some appear to be learned and many appear to be highly intelligent, endowed with knowledge and wisdom. ॥ 46॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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