श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 149: बन्धन-मुक्ति, स्वर्ग, नरक एवं दीर्घायु और अल्पायु प्रदान करनेवाले शरीर, वाणी और मनद्वारा किये जानेवाले शुभाशुभ कर्मोंका वर्णन  »  श्लोक 44
 
 
श्लोक  13.149.44 
अपरे च महाभाग्या मन्दभाग्यास्तथापरे।
अकुलीनास्तथा चान्ये कुलीनाश्च तथापरे॥ ४४॥
 
 
अनुवाद
इस संसार में कुछ लोग बड़े भाग्यशाली होते हैं और कुछ लोग अभागे। कुछ लोग तुच्छ कुल में जन्म लेते हैं और कुछ लोग उच्च कुल में जन्म लेते हैं ॥ 44॥
 
In this world some people are very fortunate while some are unlucky. Some are born in despised families while others are born in high-class families. ॥ 44॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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