vedamrit
Reset
Home
ग्रन्थ
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
श्रीमद् भगवद गीता
______________
श्री विष्णु पुराण
श्रीमद् भागवतम
______________
श्रीचैतन्य भागवत
वैष्णव भजन
About
Contact
श्री महाभारत
»
पर्व 13: अनुशासन पर्व
»
अध्याय 149: बन्धन-मुक्ति, स्वर्ग, नरक एवं दीर्घायु और अल्पायु प्रदान करनेवाले शरीर, वाणी और मनद्वारा किये जानेवाले शुभाशुभ कर्मोंका वर्णन
»
श्लोक 41
श्लोक
13.149.41
उमोवाच
महान् मे संशय: कश्चिन्मर्त्यान् प्रति महेश्वर।
तस्मात् त्वं नैपुणेनाद्य मम व्याख्यातुमर्हसि॥ ४१॥
अनुवाद
उसने पूछा - महेश्वर ! मुझे मनुष्यों के विषय में बड़ा संदेह है । कृपया उस संदेह का भली-भाँति समाधान करें ॥ 41॥
He asked - Maheshwar! I have a big doubt about humans. Please solve that doubt well. ॥ 41॥
✨ ai-generated
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd