श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 149: बन्धन-मुक्ति, स्वर्ग, नरक एवं दीर्घायु और अल्पायु प्रदान करनेवाले शरीर, वाणी और मनद्वारा किये जानेवाले शुभाशुभ कर्मोंका वर्णन  »  श्लोक 40
 
 
श्लोक  13.149.40 
शुभै: कर्मफलैर्देवि मयैते परिकीर्तिता:।
स्वर्गमार्गपरा भूय: किं त्वं श्रोतुमिहेच्छसि॥ ४०॥
 
 
अनुवाद
देवि! मैंने यहाँ उन लोगों का वर्णन किया है जो अपने पुण्य कर्मों के फल से स्वर्ग के मार्ग पर स्थित हैं। अब तुम और क्या सुनना चाहती हो?॥40॥
 
Devi! I have described here those who are situated on the path to heaven due to the fruits of good deeds. What else do you want to hear now?॥ 40॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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