श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 149: बन्धन-मुक्ति, स्वर्ग, नरक एवं दीर्घायु और अल्पायु प्रदान करनेवाले शरीर, वाणी और मनद्वारा किये जानेवाले शुभाशुभ कर्मोंका वर्णन  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  13.149.4 
श्रीमहेश्वर उवाच
देवि धर्मार्थतत्त्वज्ञे धर्मनित्ये दमे रते।
सर्वप्राणिहित: प्रश्न: श्रूयतां बुद्धिवर्धन:॥ ४॥
 
 
अनुवाद
श्री महेश्वर बोले - हे धर्म और अर्थ का सार जानने वाली, सदा धर्म में तत्पर रहने वाली, इन्द्रियों से रहित देवी! तुम्हारा प्रश्न समस्त प्राणियों के लिए हितकारी और बुद्धि को बढ़ाने वाला है, इसका उत्तर सुनो।
 
Shri Maheshwar said - The goddess who knows the essence of religion and wealth, who is always engaged in religion, who is free from senses! Your question is beneficial for all living beings and enhances intelligence, listen to its answer.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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