श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 149: बन्धन-मुक्ति, स्वर्ग, नरक एवं दीर्घायु और अल्पायु प्रदान करनेवाले शरीर, वाणी और मनद्वारा किये जानेवाले शुभाशुभ कर्मोंका वर्णन  »  श्लोक 38
 
 
श्लोक  13.149.38 
शुभानामशुभानां च कर्मणां फलसंचये।
विपाकज्ञाश्च ये देवि ते नरा: स्वर्गगामिन:॥ ३८॥
 
 
अनुवाद
हे देवि! जो मनुष्य शुभ-अशुभ कर्मों के संचय का फल जानते हैं, वे स्वर्ग को जाते हैं॥38॥
 
Goddess! Those people who know the results of the accumulation of good and inauspicious deeds go to heaven. 38॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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